मुझे पढो तो ज़रा अहतियात से पढना
मुझे पढो तो ज़रा अहतियात से पढना खुद अपनी जात में बिखरी हुई किताब हूँ मैं ......
Thursday, September 24, 2009
आप चुप क्यों हैं ?
दिल तो हमने लगाया था आप चुप क्यों हैं ?
दाव तो हमने गवाया था आप चुप क्यों हैं ?
लोग क्या नहीं कहते है हमें दुनिया मैं
आप का नाम भी आया हैं आप चुप क्यों हैं ?
ये तो कहिये की नज़र क्यों हैं खोई खोई हुई
भेद क्या हमसे छुपाया हैं आप चुप क्यों हैं ?
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